जब मैंने तुम्हें देखना चाहा,
तुम दिखे ही नहीं,
जब मैंने तुमसे मिलना चाहा,
तुम मिले ही नहीं,
जब मैं गाँव में था
तुम गाँव से निकल चुके थे,
जब मैं शहर में था
तुम शहर से जा चुके थे।
जब में राम की बात कर रहा था
तुम रावण पर बोल रहे थे,
जब में श्री कृष्ण के संदर्भ खींच रहा था
तुम महाभारत पर बोल रहे थे।
जब मैं प्यार की बात कर रहा था
तुम युद्ध के संदर्भों में तल्लीन थे,
जब मैंने तुम्हें देखना चाहा,
तुम दिखे ही नहीं,
जब मैंने तुमसे मिलना चाहा,
तुम मिले ही नहीं।
**महेश रौतेला