तु ही गुजर जाए , दौर ए हंसी जहां,
हर इक पल महकता, जैसे गुलिस्तां
पंखुड़ियों पर होती, रहेमत ओस की,
दुआ बनकर दिल ए नूर, होती जहां
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बेलफ्ज हुं हकीकत में , मैं याराना,
मौन में छुपा ,तिलस्मी राज़ रुहाना;
चाहता है नूर ए नजर आईना दिल,
रूहानियत , हाल ए दिल अंजाना;
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