शोक सत्यभामा की ओर रुक्मिणी रोई धाय बांधन को पट खोजती पट रानी अकुलाई।
तव लगी देवी द्रोपदी ने देखे यदुवीर अंगुरी बांधन को तुरत चीरो अपनी चीर।
प्यारे घनश्याम यदि काम आवे आप के तो काढ़ दूं नसो को ये तो रेशम के धागे हैं।
औ र धागे भी साधारण इनका कोन मोल करे,
न दुल्हिन के जोड़े है न दुलहे के बागे है।
मैं ने नहीं फाड़ा चीर पीर देख कर अधीर हो धागे ही स्वयं नाथ चीर छोड़ भागे है।
वो धागे हैं अभागे जो बढ़े नहीं आगे भाग उन्ही के जागे जो ऊंगली पे लागे है।