तन्हाई का अलम ,गजब छा गया है जिंदगी
बस, सुखे पत्तों की ,सरसराहट सी है यहाँ
लो रुठी गई बहारें , मुह मोड़कर दफा हुई
भीगी सी ठहर गई, गाल पर शबनमी सी यहाँ
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मौज ए मस्त ,हयाति अपनी
साहिल से मिले
दरिया दिल रहेमत उन की
आब, हयाति मिले
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धडकने नही ,धडकाने वाले कहीं
वोह ,शहद सा घुल गया ,फूल में
क्या खता हुई ,पता ना चला दििल
बस ,काटतें जनम कोई,भूल में
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