पहले इंसान बन तु
ना मै हिन्दू, नाही हूं मै मुसलमान ;
मै तो हूं महज़ एक जीता जागता इंसान ।
हमें बनाने वाला एक ही है, अल्लाह कहो या भगवान
रहे याद, हम है इस धरा पर, कुछ सालों के लिए मेहमान;
बनाके भेजा यहां मालिक ने, फूंक कर हम में जान
भूल गए हम मालिक की मर्ज़ी, उसका वरदान ;
बढ़ाने आए हैं हम यहां मालिक की आन बान शान
जिस धर्ममें दिया जन्म मलिकने, उसके बने रहे; हर धरम है महान
बस पहले कोशिश करे, बनने की एक नेक इंसान
Armin Dutia Motashaw