*ज़माना* कल भी *खराब* था ;
और *आज* भी *खराबf* है ;
*द्रौपदी* का *चीर हरण* करनेवाले को;
*भूल गये लोग* ;
पर जिसने *सीता* को *हाथ* भी *नहीं लगाया* ;
वोह आज तक *जल रहा है* !!
*रावण बनना भी कहां आसान...*
*रावण* में *अहंकार* था
तो *पश्चाताप* भी था
*रावण* में *वासना* थी
तो *संयम* भी था
*रावण* में *सीता* के *अपहरण* की *ताकत* थी
तो बिना सहमति *परस्त्री* को
*स्पर्श* भी न करने का *संकल्प* भी था
*सीता* जीवित मिली ये *राम* की ही ताकत थी
पर *पवित्र* मिली ये *रावण* की भी मर्यादा थी
*राम*, तुम्हारे *युग* का *रावण अच्छा था*..
*दस के दस* चेहरे, सब *बाहर रखता था*...!!
*महसूस* किया है कभी
उस *जलते हुए रावण का दुःख*
जो *सामने खड़ी भीड़* से
बारबार *पूछ रहा था*.....
*"तुम में से कोई राम है क्या ❓"*