मेरे प्रिय,
तुम्हारे लिखे खतों में,
एक अलग ही खुशबू थी तुम्हारे जज्बातों की
शिद्दत से लिखते थे तुम,
उस पल ना किसी और को तवज्जो दी।
नज़रें राह देखती थी डाकिए की ड्योढ़ी पर,
बड़ी उतावली रहती थी मैं,
धड़कनें घटती बढ़ती रहती थी
कुछ बात ही अलग थी,
तुम्हारे एहसासों के अंदाजे - बयानों की।