गुलिस्तां
आओ चलो , हम कुछ कर दिखाए,
भारत को एक बड़ा चमन, एक गुलिस्तां बनाए ।
पेड़ों की शाखें फूलों, फलों और सब्जियों से लचे ।
हर टेहनी , हर डाल पे असंख्य फूल फल सजे ।
गुलिस्तां में आए हर फल, फूल, सब्जियोंसे हर पौधा लचे ।
कोई मानव, जानवर या पक्षी भूखा न रहे;
और न कोई इंसान या जानवर, कातिल गरमी सहे ।
पेड़ों की छाव से मिलेगी ठंडक और मस्त हवा के झोंके ।
गर इंसान एक बार निर्णय ले ले, तो कोई ताकत उसे न रोके ।
चलो, बारिश का पानी बचाएं और वृक्ष उगाए ।
चलो अपनी इस धरा को, भारत माता को एक गुलिस्तां बनाए ।
Armin Dutia Motashaw