सुदंर कविता ..
विषय .हंसी ..
खिलते फूलों सी नाजुक तुम्हारी हंसी ।
कितनी प्यारी लगती है तुम्हारी हंसी ।।
सवेरे की किरणों सी निश्छल तुम्हारी हंसी ।
चांदनी से भी मादक तुम्हारी हंसी ।।
बिजलियों जैसी भडकीली तुम्हारी हंसी ।
चूडियों सी खननखन तुम्हारी हंसी ।।
निगाहें तो धायल करती है तुम्हारी हंसी ।
लूट लेती दिलों के चैन तुम्हारी हंसी ।।
तमन्ना है यूं ही तुम सदा हंसती रहो ।
देखते ही रहे हम सदा तुम्हारी हंसी ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला ,हाल .अमदाबाद ।।