सुदंर कविता ..
विषय .दरारें ..
दरारें जीवन को तहस नहस कर देती हैं ।
दरारें मानव का जीना हराम कर देती हैं ।।
दरारें मन का चैन सुख सब छिन लेती हैं ।
दरारें मानव के दिल में नफरत पैदा करती हैं ।।
दरारों से मानव बदला लेने की सोचता हैं ।
दरारें प्रेम व मानवता से समाप्त हो जाती हैं ।।
दरारें भाईचारे के आगे धुटने टेकती हैं ।
दरारें ममता ,मानवता के आगे हार जाती हैं ।।
दरारें जीवित व्यक्ति को लाश बना देती हैं ।
दरारें मानव जीवन का अभिशाप सी हैं ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला ,हाल .अमदाबाद ।