बरसात और चंद यादें
सावन की बूँदे
और अनकही बातें
अब और क्या कहें
बस खो जाने दो हमें।।
वो भीगता बचपन
याद आती मासूमियत
और खिलखिलाती मुस्कुराहट
अब और क्या कहें
बस खो जाने दो हमें।।
वो हवाओं का चलना
वो पत्तों का बिखरना
वो खूबसूरत हर लम्हा
अब और क्या कहें
बस खो जाने दो हमें।।
न देना कोई आवाज़
न जगाना ख़्वाब से
यादों का लिए पिटारा
अब और क्या कहें
बस खो जाने दो हमें।।
बस ....खो जाने दो हमें।।
©satender_tiwari_brokenwords