हमारा ही प्यार पहला प्यार हो
यह आवश्यक नहीं,
हमारा ही प्यार पहला प्यार हो
यह महत्वपूर्ण नहीं,
हम से पहले राधा-कृष्ण हैं,
सोहनी-महिवाल हैं,
लैला-मझनूं हैं,
हमें पंक्तिबद्ध नहीं होना है,
न ही कोई प्रतियोगिता करनी है,
प्यार की चमक देखनी है
अनुभूतियों की डोली को कंधा देना है,
मन को गहरे पसार मोती चुनने हैं,
हमारे पास असीमित समय नहीं है
जो है उसी में बलिदान हो जाना है।
देखो, शेर शिकार पर है,
बाज ऊपर उड़ रहा है,
शिकारी की आँख एकटक देख रही है,
इसी सब के बीच
हमें प्यार करना है,
शब्दों को सतरंगी बना देना है,
हमें पंक्तिबद्ध नहीं होना है,
न ही कोई प्रतियोगिता करनी है।
**महेश रौतेला