आदमी मरने से पहले जिन्दा होता है,
लिखता, लिखाता है,
पढ़ता, पढ़ाता है,
सुनी,अनसुनी कहानियां कहता है।
मरने,मारने की बातें करता है,
इस मरने,मारने के बीच
उसे स्वतंत्रता चाहिए,
अपनी सांसें और बातें चाहिए।
आजादी गरीब के लिए अहसास है
समर्थ के लिए हथियार है,
आदमी जितनी कोशिश जिन्दा रहने की करता है
उतनी ही मारने की करता है,
कभी-कभी नीले आकाश के तारों को देख
मन को बड़ा करता है।
आदमी मरने से पहले जिन्दा होता है,
मरने के बाद इतिहास होता है।
* महेश रौतेला