युद्ध की धमकियों से डरेंगे न हम ।
ग्रामसिंहों से वनराज डरते हैं क्या ।
मृत्यु निश्चित है एक बार ही आनी है ।
कायरों की तरह रोज मरते हैं क्या ।
तुम मिसाइल बनाते हो जिस नाम से ।
नाम लेते हो तुम जिसका सम्मान से ।
गौरी अब्दाली बाबर तुम्हारे थे सब ।
उन लुटेरों की औकात समझोगे कब ।
हैं क्षमाशील और शान्ति के दूत हम ।
पर न समझो की युद्ध मे हम हैं कम ।
मातृभूमि के हित प्राण दे देगें हम ।
राष्ट्र रक्षा के हित प्राण ले लेंगे हम ।
विश्वबन्धुत्व का गान गाते तो क्या ।
ग्रामसिंहों से वनराज डरते हैं क्या ।
नागरिक देश के सुन हमारे जो हैं ।
आत्मा में बसे प्राणप्यारे जो हैं ।
नयनो में आस भर कर निहारे जो है ।
वो प्रिय मेरी आँखों के तारे जो हैं ।
रक्त की आखिरी बूँद उनके लिए ।
श्वास की हर एक तार उनके लिए ।
सारे जीवन का व्यापार उनके लिए ।
बुद्ब गाँधी के वंशज हैं हम तो क्या ।
ग्राम सिंहों से वनराज डरते हैं क्या।