दबी भावनाओं को मन से निकालो ।
कुछ नेह रस तुम मुझे भी पिला दो ।
हृदय भी तो अनुभूति रस सिक्त होगा ।
जगे हैं जो कुछ लोग उनको जगा लो ।
कुछ दूरियां जो हैं दम तोड़ने को ।
बढ़ो मत रुको तुम गले से लगा लो ।
यह सर्जना विश्व उत्थान के हित ।
सम्मान के भाव की नींव डालो ।