हिमालय की बेटी -- कविता --
धन्य धन्य हो हिमा दास,
मेरे देश की तुम धरोहर हो|
स्त्री वंश का स्वर्ण मुकुट हो।
तुम नारी जाति का गौरव हो।
तिरंगा आकाश पर लहराया है,
देश का मान सम्मान बढ़ाया है।
तुम कीर्ति स्तंभ निर्मात्री हो,
नारी शक्ति ध्वजा की धात्री हो।
हिम सी शीतल, चपला, द्रुतगामी हो,
विश्व विजेता , दृढ़ साधना स्वामी हो।
जीत तुम्हारी हुई ,हिमालय मुस्काया,
हिमा दास की कीर्ति , जहाँ सारा गाया।
लगन,साधना,मेहनत की अदभुत शैली हो,
पवन वेग से उड़ने वाली अबूझ पहेली हो।
मातृ दुग्ध का कर्ज़ अदा कर दिया,
पितृ भाल गर्व से उन्नत कर दिया।
कोटि कोटि बालिकाओं की प्रेरणा हो तुम,
संघर्ष, विश्वास,प्रगति की धारणा हो तुम।
(स्वरचित,मौलिक )