सीख - लघुकथा -----
गाँव के कुछ जाने माने लोग हरी राम के घर आ धमके,"भाई हरी राम जी, आपने अपनी भेंसें बिना कोई जाँच पड़ताल किये किसी अजनबी इंसान को बेच दीं?"
"भाई लोगो, मेरी माली हालत आप लोगों से छिपी नहीं है। बाढ़ के कारण मेरा घर द्वार और खेती सब तबाह हो गया। खुद को खाने को नहीं था तो भेंसों को क्या खिलाता। अभी तो वे दूध भी नहीं दे रहीं थीं।"
"लेकिन भैया बेचने से पहले उस आदमी की पृष्ठ भूमि का तो पता कर लेते?"
"क्यों भाई ऐसा क्या गुनाह कर दिया उसने?"
"अरे भाई, वह एक कसाई है जिसे तुमने भेंसे बेची हैं।"
"चलो मान लिया गल्ती हो गयी। ये तो जानवर थीं। मगर जब दो दिन पहले बुधिया ने अपनी सोलह साल की बेटी पचपन साल के विधुर के गले बाँध दी थी तब आप लोगों का विवेक कहाँ गया था?"
मौलिक लघुकथा