"सदियों से हम सबका
एक ही सूरज रहा है
सूरज के लिये हम
कभी लड़े नहीं,फड़फड़ाये नहीं।
हवा के लिये भी
हमने शिकायत नहीं उठाई
कोई लूटपाट नहीं मचायी।
सूरज से कभी नहीं कहा
देर से क्यों आये
उस देश को अधिक धूप
इस देश को अतिशय ठंड
इस धर्म में उजाला
उस घर में अंधेरा,
मेघों के आगे-पीछे होने का
वृतान्त भी नहीं मांगा।
बिना लड़ाई-झगड़े के
सदियों से हम सबका
एक ही सूरज रहा है
एक ही हवा के हम अनुयायी रहे हैं।"
***महेश रौतेला