तेरी गली से अकसर हम छुपकर गुजर जाएँगे
न हो परेशाँ कि हम कभी शोर न मचायेगे
जो दिख गए तुम तो ख़ुश क़िस्मती पर इतरायेगे
न दिखे तुम तो अपनी बदक़िस्मती पर पछतायेगे
माना कि गुरूर बहुत है तुमको ख़ूबसूरती पर
तेरे ग़ुरूर को भी हम अपनी पलकों पर सजायेंगे
- Rj krishna