बात उस वक़्त की हैं जब मै उनका क्लोज शॉट्स विथ डायलॉग के ले रहा था.... लेकिन वो एकाग्र नहीं हो पा रहीं थी... 20रीटेक हो चुके थे लेकिन परफेक्ट शॉट नहीं हो पा रहा था मै बार बार कट कर वन मोर वन मोर कहे जा रहा था पता नहीं वो उसदिन इतनी अपसेट क्यों थी जबकि हम रोज 16-17 घंटे शूट किया करते थे लेकिन कभी ऐसा नहीं हुआ था उनका हर टेक एक या दो बार में ओके हो जाया करता था....
जब मैंने फिर से वन मोर कहा तो वो मुझ पर चिल्ला पड़ी और सेट से उठ कर चली गई हम सब दंग थे....
बरहाल मैंने पेकअप का आदेश दें दिया क्योंकि रात के 1बज चुके थे....हालांकि मुझें कुछ समझ नहीं आ रहा था.
जब कल में सुबह सेट पर पहुंचा तो मेरे पहुंचते ही pro ने कहा कि विध्या जी ने आपको याद किया हैं... में फ़ौरन उनकी वेनिटी में पहुंचा और रोज़ की तरह मैंने उनके पैर छुए और चुप चुप चाप बैठ गया था.... उन्होंने मुझें थोड़ा रूखे पन से कहा.... अगर ये बात कल कहती तो शॉट कबका ओके हो चुका होता....
मै कुछ समझ नहीं पाया था...
कौन सी बात....?
उन्होंने मेरे सर पर एक चपत जड़ते हुए कहा था ...
नालायक तुझे पता हैं कल क्या था....?
मुझें सही में नहीं पता था....
कल क्या तारीख थी..?
21...
जिंदगी में काम ही सब कुछ नहीं होता... कल किसी ने तुझे विश किया...? नहीं ना...
ओफ.... इतना कहकर मै चुप हो गया था...
तभी ad ने आकर सूचना दी की सर शॉट रेडी हैं तभी उन्होंने कहा शूट बाद मे होगा सब सेकंड स्टूडियो मे पहुँचो...
उनका आदेश सर्वमान्य था तो पूरी यूनिट वहा पहुंची जाकर पता चला की वहा कल से मेरे जन्मदिन की पार्टी के लिए विदया जी ने अरेंजमेंट करा कर रखा था...
मैंने उनसे कहा.... आपने कल कहा क्यों नहीं...?
तब उन्होंने बड़ी ही शालीनता से कहा....
तुम हमारे डायरेक्टर हो जबतक पेकअप नहीं कहते तो पार्टी कैसे मनाते... और जब पेकअप हुआ तो काफ़ी रात हो चुकी थी... और फिर मेरा मूड भी ओफ हो गया था... चलो अब केक काटो.....
उस वक़्त मेरी आँखों मे आंसू थे....
ऐसी थी विदया सिन्हा जी जिन्होंने मुझें इस काविल समझा था...
अभूतपूर्व श्रद्धांजलि... ?????