जय भोले भंडारी
आर0 के0 लाल
मां पार्वती ने पूंछा - " भगवन! आप के मंदिर में भक्तों की लाइन लगी है। सभी के हाथों में ढेर सारे बेलपत्र, मदार , धातुरा, भांग, पुष्प और जल से भरा कमंडल है। सभी आपको बड़ी मात्रा में समर्पित कर रहे हैं मगर मैं देख रही हूं कि बदले में आप इन्हें कुछ नहीं दे रहे हैं, क्या आप इनसे प्रसन्न नहीं है?"
प्रभु बोले- " प्रिये ! वैसे तो मैं सबसे ही प्रसन्न रहता हूं परंतु ज्यादातर लोग मेरी बनाई हुई चीजें ही मुझे दे रहे हैं, इसमें क्या खास बात है?
मां फिर बोली- मानव तो कुछ बना नहीं सकता फिर वह आपको क्या समर्पित करें?"
भोले भंडारी बोले कि देवि, आप जानती ही हैं कि मनुष्य देवताओं से भी ज्यादा मानवता के अनेक आयाम सुजित करता है जैसे मित्रता, दयाभाव, शिष्टता, विश्वासपात्रता आदि। साथ ही वह शत्रुता, अहंकार, अहम, छल कपट आदि अनेक कुव्यवहार भी विकसित करता रहता है। इनमें से अगर वह कुछ भी हमें समर्पित कर दें तो यह मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय होगा।