बरसात के गड्ढ़े
सुंदर पगडण्डी
बरसात जब पड़े,
बिजली जब कडके
बन जाते हैं, और बड़े,
ये बरसात के गड्ढ़े।
मेरी सुंदर गाड़ी पर,
कितने छिटे पड़े
जगह- जगह,हैं पड़े,
ये बरसात के गड्ढ़े
होते हैं बड़े बड़े,
ये बरसात के गड्ढ़े,
जो भी इसमें गिर पड़े,
कपड़ों की हालत हो ऎसी ,
जैसे आलू हो सड़े से,
Uma vaishnav
मौलिक और स्वरचित