संस्मरण :-रक्षाबन्ध
रक्षाबंधन का पर्व भाई - बहन के स्नेह का प्रतीक है ,इस दिन का इंतजार दोनों को रहता हैं, इस दिन बहनें कहीं भी हो या किस भी हाल में हो पर अपने भाई को राखी बाँधना नहीं भूलती अगर किसी कारणवश वो बांधने नहीं जा पाए तो भी राखी भेजना नहीं भूलती।
मैं भी हर साल अपने दोनों भाइयों को राखी भेजती हूँ, वो राजस्थान में हैं और मैं गुजरात इसलिए हर साल जाना संभव नहीं हो पाता है। इस पर्व का इंतजार मुझे भी हर साल रहता हैं,आज 13 साल होगए। अपने भाई को अपने हाथों से रखी बांधे। मेरी माँ के देहांत के बाद एक भी राखी मैंने अपने मायके में नहीं मनाई । मुझे आज भी रक्षाबंधन का वो दिन बहुत याद आता है, जो मैंने अपने मायके में मनाई थी और उस दिन को याद करके मेरी आँखों में पानी आ जाता है, अब भी हर राखी को मेरी सारी बहनें आती हैं, पर मैं नहीं जा पाती हैं , हर साल कुछ न कुछ अरचन आ ही जाती हैं जिस की वजह से मैं मायाके नहीं जा पाती ।
अब तो तबीयत भी अच्छी नहीं रहती । पता नहीं अब कोई राखी अपने मायके माना पाऊँगी या नहीं ।
Uma vaishnav
मौलिक और स्वरचित