मर्द कभी बलात्कार नहीं करते हैं
मां की कोख शर्मशार नहीं करते हैं
मर्द होते तो लड़कियों पर नहीं टूटते
मर्द हमेशा दिलों को जीतता है
कुचलना नामर्दों की नीचता हैं
बेटियां और बहन मर्द के साए में पलती है
मर्द की जान मां की दुआओं से चलती हैं
मर्द नहीं फेकते तेज़ाब उनके शरीर पर
मर्द प्रेम में मिट जाते हैं अपनी ही हीर पर
मर्द उनको देह की मंडियों में नहीं बेचता
मर्द दहेज के लिए उनकी खाल नहीं खिंचता
मर्द बच्चियों के नाज़ुक बदन से नहीं खेलते
मर्द बेटियों को बूढों के संग नहीं धकेलते
फिर भी तू अगर खुद को मर्द कहता है
बेबस लड़कियों पर ज़ुल्म को फर्ज कहता है
खुदा का अपनी ही करनी पर झुक गया है सर
ये जानवर तो फिर भी तुझसे हैं बेहतर
*POOJA*