वह जीवन भर गुस्ताखियां करता रहा
उसकी हर गुस्ताखी जैसे उसे और बड़ी गुस्ताखी करने के लिए चुनौती देती थी और वह चुनौती स्वीकार कर कर भी डालता था
बचपन के मित्र की वह हर बात मान लेता था लेकिन गुस्ताखी के समय उसे डार्क में रखता. पता चलने पर मित्र मना करता कि
ऐसी हरकतें किसी दिन बड़ी हाहाकारी साबित होंगी. लेकिन वह मित्र जीना सीखो जीना कह कर अगली गुस्ताखी कर डालता
आखि़र मित्र की बात सही निकली उसकी एक गुस्ताखी ने उसे ही नहीं बल्कि उसके पूरे घर को तबाह कर दिया.
"शकबू की गुस्ताखियां"
दो मित्रों की इस मर्मस्पर्शी कहानी को
पढ़िए Matrubharti पर
देखिये कहीं आप का कोई मित्र तो ऐसी गुस्ताखियां करने का आदी नहीं है.