मैं तो लौटना चाहता हूँ जिन्दगी,
तेरी सुगबुगाहट देखना चाहता हूँ जिन्दगी,
जहाँ तक मन जाता है जाना चाहता हूँ जिन्दगी,
सूखी यादों को हरा करना चाहता हूँ जिन्दगी।
प्यार के साथ तुझे पीना चाहता हूँ जिन्दगी,
तेरी आहट सुनना चाहता हूँ जिन्दगी,
बातों का सिलसिला रोकना नहीं चाहता हूँ जिन्दगी,
उम्र की पावबंदियों में भी बड़ी उड़ान चाहता हूँ जिन्दगी।
*महेश रौतेला