बस मे नहि
सोचा था तुम्हे हमेशा अपने पास रखू,
अपनी हाथो कि लकीरों मे बसा के रखू,
पर लकिरों मे बसी तकदीर कहा अपने बस मे होती हे
जैसे प्यार करना और उसे पाना हर बार हमारे बस मे नहि होता,
जैसे कहने को तो हम बहोत सी बाते सोचते हे पर कभीभी उन बातो पर हमारा बस नहि होता,
जैसे करने का तो हम सबकुछ सोचते हे पर सबकुछ करना हमारे बसमे नहि होता,
बस हमारे रिश्तेका भी कुछ ऐसा ही हे,
कहने को तो हम दोनो इसमे बंधे हे पर एक बंधन मे कभी नहि बंध सकते
शायद इस रिश्ते को बनाना और संजोना हमारे बसमे था,
पर इसे हमेशा के लिए बनाए रखना हमारे बस मे नहि