बदनाम बस्ती....Red Light Area
यहाँ दिन में कभी दिन नहीं होता
चौगुनी रात रहती है
जिधर सूरज की रोशनी
सिर्फ इच्छा में संभव है
जहाँ के मौसम में हमेशा
पतन की खौफनाक बदबू उड़ती है,
यह वही श्मशान है
जहाँ वासना की जिंदा लाशें
हवश का नृत्य करती हैं
जिसकी दिशाओं से दमन की गूँज उठती है
जिसकी हवाओं में बदनाम आत्माओं की चीखें सुनाई देती हैं,
यहाँ आते ही औरत की सारी परिभाषाएँ उलट जाती हैं
वह न तो बहन है, न बेटी
न ही किसी की पत्नी,
माँ कहलाने की गलती वह सपने में भी न करे
यहाँ वह औरत भी कहाँ रह जाती है?
वह तो बस
प्रतिदिन परोसी जाने वाली थाली है
या फिर कोई मैली झील
जो सिर्फ जानवारों की प्यास बुझाने के काम आती है।"