आज फिर खूब इतरा रहा है वो ही तिरंगा।
भारत मां की बेटी ने शान से लहराया जो था।
बहुत रोए, बिलखे होंगे वो मनहूश कसाई हे।
तुझ सी ही परछाईं की, भूर्ण हत्या करवाई हे।
आज फिर खूब इतरा रहा है,,,,,,,,,
गर्व है तुझ पर हिमा दास तू जो कर आईं हे।
आसाम कि पुत्री आज पांच गोल्ड मेडल दहेज में लेकर आई है।
आज फिर खूब इतरा रहा है,,,,,,,,
रख खुद पर भरोसा और हौसलों की उड़ान भर।
ओ ढिंग एक्सप्रेस,,, तुझे अभी रचने कई इतिहास हे।
आज फिर खूब इतरा रहा है वोही तिरंगा,,,,
भारत मां कि बेटी ने शान से लहराया जो था।
मेघा....✍