नमस्कार दोस्तो बहुत पहले मैंने एक काव्य रचना की और भूल गया आज मेरी नज़र पड़ी तो सोंचा आपके साथ साझा किया जाए उम्मीद करता हूँ नाउम्मीद नही करेगी तो पेश है---
(#तू इतना सब अगर कर दे तुझे भगवान मानूँगा#)
हे पत्थर चल के तू दिखला , तुझे भगवान मानूँगा ।
जो कर दे संजली जिंदा , तुझे भगवान मानूँगा ।।
निर्भया की जो चीखें आज भी , कानों में चुभती हैं ।
तू चीखों को हँसी कर दे , तुझे भगवान मानूँगा ।।
आसिफ़ा की जो लुटातीं , आबरू का मूकदर्शक है ।
ओ मन्दिर ख़ाक कर दे , तो तुझे भगवान मानूँगा ।।
ओ हँसता खिलखिता रूप , फिर से जो तू लौटा दे ।
जलन तेज़ाब की तू इत्र कर , तो तुझे भगवान मानूँगा ।।
मज़हबी आग में जलते हुए , गर घर बचा ले तू ।
मिटा दे भेद नशलों का , तुझे भगवान मानूँगा ।।
जले न फिर कोई बेटी , दहेजू आग में जलकर ।
तू इतना सब अगर कर दे , तुझे भगवान मानूँगा ।।
तुझे भगवान मानूँगा , तेरा ऐहसान मानूँगा ।।
-Panna