आपको
ओ चंदा, जा के उन्हें सुना दे, कहना, " मै रूठ गई हूं आपसे"
हवा के संग, गर मै उड़ सकती तो करती फरियाद आपसे;
बादलों का बिछोना बनाके, भीगी फिज़ाओं में मिलती आपसे ।
चंदा को देखूं नील गगन में मुस्कुराते और मन ही मन बातें करु आपसे
झिलमे भी चंदा मुस्कुराता है, चाहत उमड़ रही है, जरा छु लुं मैं आपको
पर कोई कहा चांद को छू सकता है; तो फिर मैं कैसे छु सकूं आपको
देवता तो रहते हैं मंदिरमें, मीरा बिचारी, छु न सकी आपको
नाची, भजन रचे और गाए आपके लिए; फिर भी कहां पा सकी आपको ?
Armin Dutia Motashaw