ज्यादा बदलाव चाहोगे तो
पीट दिये जाओगे,
अधिक परिवर्तन चाहोगे तो
मार दिये जाओगे,
बहुत सुधार चाहोगे तो
जेल भेज दिये जाओगे!
मांगने पर कौरवों ने
पाँच गांव भी नहीं दिये थे,
और तुम जनता के लिए
अच्छा तन-मन-धन मांग रहे हो!!
जो अंग्रेजों ने बिछाया-ओढ़ाया
उसी को बिछाया,ओढ़ाया करो,
क्योंकि अभी परिवर्तन की बयार धीमी है,
सुधार की हवा ठंडी है!
* महेश रौतेला