मोहब्बत तेरी बड़ी ही कमाल निकली
तू बेवफ़ा और तेरी यादे वफ़ादार निकली
रोज़ चली आती हैं तेरी यादे बिन बुलाए
तुझसे अच्छी तो तेरी तसबीर निकली
हर रोज़ मनाती हूँ आईने में ख़ुद को
दर्द से जुड़ी अलादी मेरी तक़दीर निकली
बन्द आँखों में ख़्वाब सिर्फ़ तेरा बन्द था
आँख उठाकर देखा तो तेरी तसबीर निकली
रोज़ तोड़ जाती हैं तेरी बातें दिल को
फिर भी तुझसे चाहत बेहिसाब निकली