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Ritu kumari

Ritu kumari

@ritukumari509471
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मेरा वजूद
​मैं किसी की ख़्वाहिशों का मोहताज़ नहीं,
मेरा वजूद ख़ुद मेरी पहचान है।
ज़माने की नज़रों में चाहे जो भी हूँ मैं,
मेरी हिम्मत ही मेरा असली आसमान है।
​नाप नहीं सकती यह दुनिया मेरी उड़ानों को,
मैंने ख़ामोशी से अपने पंखों को तराशा है।
गिरे हैं कई बार, पर हर बार उठे हैं,
ज़िंदगी की हर चुनौती को हँसकर तराशा है।
​न मुझे किसी के सहारे की तलाश है,
न ही किसी की दी हुई पहचान चाहिए।
मैं अपनी राह ख़ुद बनाती चली जाऊंगी
मुझे बस अपने सपनों का वो जहान चाहिए।
​जो आज ढला है, वो कल फिर उगेगा,
मैं उस सूरज की तरह अटूट विश्वास हूँ।
मेरी सादगी ही मेरी सबसे बड़ी ताक़त है,
मैं ख़ास नहीं, पर ख़ुद में बेमिसाल हूँ।

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"इंसानी वजूद"
नाज़ किस बात का करता है ऐ बंदे,
यह जिस्म तो मिट्टी की एक अमानत है।
तेरी असल अहमियत तेरे अलफ़ाज़ों में है,
वरना सांसें तो हर जानदार की आदत है।
किसी के गिरते हुए आंसुओं को पोंछ दे,
तो समझ कि तेरा होना साकार हुआ।
वरना आने-जाने के इस सिलसिले में,
कितने आए और कितनों का वजूद खाक हुआ।
वक्त रहते बांट ले थोड़ी खुशियां और सुकून,
कि इस ज़िंदगी का कोई ठिकाना नहीं।
कर ले कुछ ऐसे नेक काम इस जहान में,
कि जाने के बाद भी तुझे कोई भुला पाए नहीं।

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​"खामोशी का साया"
​कमरे के एक कोने में,
धुंधली सी एक परछाई है।
घड़ी की हर एक टिक-टिक में,
बस गहरी एक तन्हाई है।
​ठंडी होती चाय की प्याली,
खिड़की पर बैठा एक परिंदा।
कुछ खामोश से पन्ने दिल के,
पूछ रहे हैं, "क्या तू है जिंदा?"
​न कोई चीख, न कोई आँसू,
बस एक भारी सा सन्नाटा है।
वक्त की बहती धारा ने भी,
किनारा अपना कहीं बाँटा है।
- Ritu kumari

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उड़ान अभी बाक़ी है, आसमां से कह दो,
हवाओं के रुख़ से कह दो, थोड़ा थम कर बहें।
अभी तो नापी है मुट्ठी भर ज़मीन हमने,
अभी तो पूरा जहान नापना बाक़ी है।
दिए जो राहों के बुझ भी जाएँ अगर,
तो जुगनुओं से रोशनी छीन लेंगे।
ठोकरें लाख आएँ सफ़र में मगर,
हम गिरकर फिर उठना सीख लेंगे।
जो मुक़द्दर में नहीं, वो हम छिन लाएँगे,
जिद्दी हैं इतने कि ज़माने को झुकाएँगे।
आँधियों की क्या औक़ात जो रास्ता रोके हमारा,
हम वो परिंदे हैं जो तूफ़ानों में भी आशियाना बनाएँगे।

- Ritu kumari

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दिन भर की झूठी मुस्कान का नक़ाब अब उतार दिया है,
रात के सन्नाटे ने फिर से मुझे पुकार लिया है।
जो दर्द छुपाया था सीने में दुनिया की नज़रों से,
उस बहते हुए आँसू ने आज फिर मुझे थाम लिया है।
ना कोई शिकवा किसी से, ना कोई उम्मीद बाकी है,
इस अँधेरे कमरे में बस मेरी तन्हाई ही काफी है।
थक चुके हैं ख़्वाब भी इस दिल का बोझ उठाते-उठाते,
सो जाती हैं आँखें भी अब खुद को रोज़ बहलाते-बहलाते।
ऐ चाँद, तू ही दे-दे अपने सुकून की थोड़ी सी छाँव,
बहुत भारी लगने लगे हैं अब इस ज़िंदगी के पाँव।
good night ❤️............

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जब खुला दरवाज़ा तो पाँव ठहर गए,
रिहाई के ख़याल से ही हम तो डर गए।
तरसते थे जो कभी बेफ़िक्र उड़ानों के लिए,
आज वो परिंदे इस ख़ामोश ज़मीं पर मर
गए।
इन सलाखों की छाँव में ही सुकून मिलने लगा,
हम तो इस क़ैद के साए में ही सँवर गए।

जिस आज़ादी के ख़्वाब में बिताई थी उम्र,
अब उसी आज़ादी के नाम से ही बिखर
गए।
- Ritu jaiswal

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जो राह चुनी है तुमने, उस पर डटकर चलना होगा,
सूरज की तरह तपना है, तो हर रोज़ ढलना होगा।
तूफ़ानों से डरकर नाव किनारे नहीं लगती,
मेहनत की आग में तपे बिना क़िस्मत नहीं चमकती।

अँधेरों की साज़िशें अब तुझे डरा न पाएँगी,
तेरी मेहनत की गूँज एक दिन नया इतिहास बनाएगी।
यह जो चुभते हैं राहों के पत्थर, इन्हें ढाल बना ले,
हर नाकामयाबी को तू अपनी जीत का मक़ाम बना ले।
कौन कहता है कि किस्मत का लिखा बदला नहीं जाता?
ज़िद अगर सच्ची हो, तो कोई ख़्वाब अधूरा नहीं रहता।
नाप ले आसमान को अपनी बुलंद उड़ानों से,
तोड़ दे हर वो ज़ंजीर जो बाँधती है तुझे ज़माने से।
तू रुक मत, तू झुक मत, बस आगे बढ़ता चल,
आज का यह पसीना ही बनेगा तेरा आने वाला कल।
तेरी ख़ामोशी में आज जो एक तूफ़ान छुपा है,
कल वही इस पूरी दुनिया का सबसे बड़ा शोर बनेगा।
- Ritu jaiswal

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कभी थक जाओ राहों में, तो जरा सा ठहर जाना,
ना हारना खुद से कभी, बस थोड़ा संभल जाना।
उम्मीदों के दिए जलाकर, अँधेरों को मिटाना है,
तूफान कितना भी गहरा हो, दीया बनकर टिमटिमाना है।
जो छूट गया पीछे, उसे मुड़कर क्यों देखना,
जो आज तुम्हारे पास है, उसी में खुदा को देखना।
गिरे हो अगर जमीन पर, तो उठना भी तुम्हीं को है,
सपनों के आसमान में, फिर उड़ना भी तुम्हीं को है।
- Ritu jaiswal

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