गुरु किसी भी रूप में हो सकता है... इसके लिए ये जरूरी नहीं कि वो पढ़ा - लिखा या शिक्षक ही हो.. हर वह व्यक्ति गुरु के समान होता है, जिससे हमें कुछ शिखने को मिले. इसके लिए मेरी ये??रचना अवश्य पढ़ें।
"अंनपढ़ - गुरु", को मातृभारती पर पढ़ें :
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