रिश्तो से घिरी जिंदगी ये मेरी,
बेड़िया समजू या पंख इन्हें।
टूट के बिखरा हु इन रहो पे,
कोई भी नही है संग मेरे।
दिल की दीवानगी का ऐसा आलम हुवा है कि क्या बताउ,
जैसे दिमाग मे चल रही हो कोई जंग जैसे।
तलाशे फिरता हूँ मै सुकून वही, जहा कभी होते थे वो संग मेरे।
वही जगहे आज हस रही है मुझ पे वैसे,
जैसे की वो ही हो संग मेरे।
अब आगे और क्या लिखूं,
सिर्फ आंसू ही है संग मेरे।
रिश्तो में ही यू जकड़ा है,
वार्ना ना होता संग तेरे।
#संग तेरे By
- शून्य सा