Hindi Quote in Poem by Ankit

Poem quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

"टूटता हुआ मन"

क्या होगा जो में एक दिन शांत हो जाऊंगा
कुछ बदलेगा, अथवा सब यथावत चलता रहेगा
क्या मेरी शांति भी किसी को मुखर कर पायेगी
क्या वे तब अपने टूटे हुए किस्सों को जोड़ पाएंगे
क्या तब हम स्वयं को मानव सिद्ध कर पाएंगे।
क्या होगा उस दिन जब में शांत हो जाऊंगा।

क्या होगा जब ये दावानल, सबको जलाने लगेगी
ओर नीर भी आपसे दूर भाग खड़ा होगा,
जब इन ठंडी हवाओं की जगह, अग्नि पिंड गिरने लगेगें
ओर ये मिट्टी लावा बन जाएगी।
लेकिन क्या ये उतना खतरनाक होगा,
जितना मनुष्यत्व का गिर जाना, अथवा
संवेदनाओ का मर जाना।
कितना अच्छा लगेगा जब एक चिड़िया अपने नन्हें बच्चे को सिगरेट देगी,
ओर उसकी चहचहाहट , जलवायु से हार जाएगी।
क्या होगा जब में शांत हो जाऊंगा।

क्या होगा जब मुखर ,मौन का ग्रास बन जायेगा
क्या होगा जब ये गुंजायमान प्रकृति आँसुओ से भीग जाएगी।
या फिर जब ये धरा ,अपनी सर्वश्रेष्ठ कृति को खो देगी।
तब कोई जागेगा, जब सिर्फ सोना ही विकल्प होगा
या फिर निर्माण, नियति को ही डस लेगा।
क्या हम आँखों को इतनी शक्ति दे पाएंगे, की वो देख सके
रोज मरती हुई मानवता को, तड़पती हुई इंसानियत को
क्या में ये सब देखकर सांस ले पाऊंगा,
तो बताइये फिर क्या होगा
जब में फिर शांत हो जाऊंगा।

जब जीवन से अच्छा मृत्यु का वरण लगने लगेगा
जब साँसों को उखड़ते हुए कोई रोक न पावेगा
हम सभ्यताओं के प्रतीकों को नष्ट करते जाएंगे,
ओर संस्कृतियां भी समाधिस्थ होने लगेंगी, तब क्या होगा
ओर ये सारे अनहाद, धीरे-धीरे बिखरने लगेंगे,
फिर भी एक भरम है,
क्या होगा जब सूर्य एक लाल दानव तारा बन जायेगा,
लेकिन एक शंका भी,
की क्या नष्ट होने के लिये सूर्य का मिटना ज़रूरी है,
क्या अब भी कुछ मिटना बाकी है?
अगर हाँ तो उसे भी जल्दी मिटा दो, क्योंकि में अब प्रखर नही हो पाऊंगा,
में शांत हो जाऊंगा।

क्या होगा उस दिन जब में मर जाऊंगा
मेरी जाती हुई आत्मा क्या सबसे सवाल कर पायेगी
ओर क्या वे समर्थ होंगें मुझे जवाब देने में
क्या में बता पाऊंगा अपने हृदय की वो बातें
जो मेरी अंतिम सांस तक मुझे कचोटती रही,
मेरे हर सुकून, हर पल के वे छीने हुए सुख
क्या कोई लौटा पायेगा,
क्या होगा जब मेरी ये शांति मुझे अनंत सुकून देगी,
ओर अभिव्यक्तियों की लालसायें लिए जीते-जी में फिर मर जाऊंगा।

©अंकित-शब्द-समर

Hindi Poem by Ankit : 111210468
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now