कितने रूपये में कपड़े प्रेस करती हो ,साहब दस के दो | दस के दो मतलब मैंने अनजान भाव से पूंछा तो बोली साहब एक पेंट और एक शर्ट , दोंनो दस रूपये में प्रेस कर देती हूँ और आपका कपड़ा भी मै प्रेस कर दूँगी | मैं काफी मुश्किल में पड़ गया क्योंकि मेरे पास कुल पांच कपड़े थे जिसमें से दो शर्ट और एक पेंट मेरा तथा एक पेंट शर्ट का सेट गार्ड साहब का था जो चलते समय बड़ी विनम्रता से मुझे पकड़ा दिया था | उसने कहा कुल तीस रूपये लगेंगे साहब जिस पर मैंने कटाक्छ करते हुए कहा , क्यों पांच कपड़े के तो पच्चीस ही हुए इस पर उसका एकदम खरा जबाब ... नहीं साहब चाहे आप एक कपड़े प्रेस करवाएं या दो ,दोनों ही स्थिति में आपको दस देने होंगे |
पच्चीस ही ले लीजियेगा बड़ी विनम्रता से मैंने कहा ओ मान गयी और बात को आगे बढ़ाते हुए बोली अपनी भाषा में “ नया लग रहा है तु,पहली बार देख रही हूँ तुझे” | काफ़ी अजीब सा लगा मुझे पर मैंने सर हिलाते हुए हामी भर ली जो काफी व्यवहार कुशल लगने वाली थी इसलिए उसने बातों का सिलसिला जारी रखते हुए बोली ... “साहब अलीगढ़ उत्तर प्रदेश की रहने वाली हूँ” अच्छा .............
तो यहाँ कैसे –जबाब देते हुए बोली साहब मां –बाप पहले यहीं रहते थे सो बचपन में ही ले आये और अब तो रहते रहते सारा काम सीख गयी हूँ , सुबह पांच बजे उठती हूँ और सारे कपड़े धुलकर फिर बच्चों को टूशन देती हूँ फिर खाना बनाती खिलाती हूँ उसके बाद दिन में जो ओरतों की साड़ियाँ रहती है उसको प्रेस करती हूँ तो बज जाते है चार और चार बजे से साहब यहाँ आ जाती हूँ कपड़े प्रेस करने ....और ये लो साहब आपके कपड़े प्रेस हो गए |
मैं पहली बार उस गली में गया था और अँधेरा भी काफी हो गया था इसलिए मुझे कुछ डर सा भी लग रहा था मैंने सौ रुपये की नोट निकाल कर उसे दिए जिसमें से उसने सत्तर रूपये वापस करते हुए बोली साहब छुट्टे नहीं है और इस प्रकार उसने अपने पांच रूपये का हिंसाब कर लिया ||