एक सच:
मैं तुम्हें एक बात लिख रहा हूँ। मेरे घर के पास ही एक सुन्दर बगीचा है। उसके एक कोने पर बच्चों का पार्क है। बच्चे वहाँ झूला, फिसलन पट्टी आदि खेल खेलते हैं। सुबह बुजुर्ग लोग योग करने वहाँ आते हैं और कुछ केवल घूमते हैं। मैंने देखा एक बुजुर्ग महिला और एक बुजुर्ग आदमी भी काफी दिनों से वहाँ आते हैं। पहले दोनों अलग-अलग बेंचों पर बैठे मिलते थे। एक दिन आदमी महिला को अकेला देख उसके पास बैठ गया। दोनों में बातचीत आरंभ हुई। आदमी बोला उसका लड़का और लड़की अमेरिका में हैं। पत्नी गुजर चुकी है। बच्चों को उसकी कोई परवाह नहीं है।वह अकेला रहता है। बुजुर्ग महिला ने कहा उसका लड़का और बहू भी उससे कोई संबंध नहीं रखते हैं। वह अकेले रहती है। दोनों रोज अपने-अपने सुखी और उदास जीवन की कहानियां एक दूसरे को सुनाते हैं। एक दिन महिला उसे अपने घर पर आमंत्रित करती है। कहती है कभी घर आइये,साथ-साथ चाय पियेंगे। वह उसके घर जाता है। दोनों में मेलजोल बढ़ता है और विचारों में एकरूपता आने लगती है।कुछ समय बाद आदमी महिला को कहता है, "हम दोनों की स्थिति एक समान है। हम एक दूसरे का सहारा बन सकते हैं।तुम बीमार पढ़ोगी तो मैं देखरेख करूंगा और मुझे कुछ होगा तो तुम। क्यों न हम शादी कर लें?" वह उसके प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती है। आदमी की शादी की खबर अमेरिका उसके बच्चों को मिलती है और वे दोनों दौड़े-दौड़े पिता के पास पहुंच जाते हैं।और दोनों पिता से संपत्ति में अपना हिस्सा मांगते हैं। पिता जो उनके अतीत के व्यवहार से कठोर हो चुका था, उन्हें घर से निकाल देता है। अब दोनों बुजुर्ग खुश हैं और कभी-कभी बगीचे में आते हैं।
*महेश रौतेला