विचारों की अभिव्यक्ति
आर 0 के 0 लाल
एक ही परिवार के सदस्यों को अपनी अलग अलग रुचि अभिरुचि और सोचने समझने का ढंग होता है परंतु परिवार को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक है कि उन्हें एक सामंजस्य स्थापित हो। इसलिए हमें कभी अपने विचारों को निर्धारित सीमाओं के भीतर ही संकुचित करना पड़ता है और कभी न चाहते हुए भी दूसरों की इच्छाओं को सहना पड़ता है। हमें कोशिश करनी पड़ती है कि परिवार के सदस्यों की विचार धाराओं का स्तर एक समान बना रहे। इसमें असमान उतार-चढ़ाव से परिवारिक नैया डगमगाने लगती है और नतीजा आपसी टकराव होता है। किसी के मन में क्या है यह परिवार के सभी लोगों को समझ लेना चाहिए वरना किसी के द्वारा किया गया हितकारी कार्य भी किसी विशेष परिस्थिति में अहितकारी प्रतीत हो सकता है। किसी की मंशा क्या है अगर यह समझा जा सके तो अनेकों भ्रम से बचा जा सकता है। इसलिए पारिवारिक जीवन में विचारों और भावनाओं की अभिव्यक्ति जरूरी है।