Hindi Quote in Blog by Meenakshi Dikshit

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कुछ वर्ष पूर्व की बात है, मैं आकशवाणी के युव वाणी कार्यक्रम के अंतर्गत नियमित रूप से Eco-friends के शीर्षक से एक चर्चा करती थी , जिसमे हर दिन पर्यावरण संरक्षण से जुड़े एक ऐसे उपाय के विषय में बताया जाता था जिसे अपनाना और जीवन में उतारना बहुत आसान होता था. जैसे कागज़ के दोनों तरफ लिखना या प्रिंट निकालना, घर के नालों का टपकना रोकना, AC तथा Fridge जैसी choro-Floro carbon उत्सर्जित करने वाली चीज़ों का कम से कम प्रयोग करना, पॉलिथीन का प्रयोग कम करना.

उन दिनों आकाशवाणी तक अपनी बात पहुचाने के लिए हमारे श्रोता पोस्ट कार्ड का लिखा करते थे. एक श्रोता ने मुझे लिखा, मीनाक्षीजी कृपया बिन्दुवार बताएं कि इनमे से आप कितने सुझावों पर अमल करती है? अन्यथा इन्हें बताना बन्द कर दें. बात चौंकाने वाली थी क्योंकि हम कार्यक्रम प्रस्तोता प्रायः " आपकी आवाज़ बहुत मीठी है", "कार्यक्रम बहुत अच्छा लगता है" जैसी बातें पढने के आदि होते हैं.

लेकिन उस पत्र ने मेरे मन को झकझोरा.

निश्चय किया- कागज़ का दुरुपयोग कदापि नहीं, कितने पेड़ कटते हैं कागज़ बनाने के लिए? पॉलिथीन का प्रयोग लगभग छोड़ दिया है, घर में AC नहीं लगाया, Fridge दिसम्बर-जनवरी में बंद रखती हूँ, कोशिश है जब तक संभव है दो पहिया वाहन से ही काम चल जाये. मेरे व्यक्तिगत उपभोग से पर्यावरण को कम से कम क्षति हो.

उस श्रोता का नाम याद नहीं, लेकिन उसका एक बार फिर धन्यवाद् आप सभी से इस अपेक्षा के साथ कि अपनी छोटी सहूलियत की तुलना में पर्यावरण को महत्त्व दें.

ये वसुंधरा माँ जिसकी, गोद में हमने जन्म लिया, खाकर जिसका अन्न अमृत सैम निर्मल शीतल नीर पिया, श्वासे भरी समीर में, जिसका रक्त शारीर में आज उसी कि व्याकुल होकर ममता तुम्हे पुकारती......आओ सब मिल कर माँ वसुधा के संरक्षण में अपना गिलहरी योगदान दें,

Hindi Blog by Meenakshi Dikshit : 111205314
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