यादों को भूलाने के लिये एक नया लम्हा जीना पड़ता हे वरना आज कल कहा कोई याद रखता है।भूल जाता है हर कोई अपनी यादों का फसाना जैसी जिसकी जरूरत वैसे वो याद करता है। आज कल कहा कोई यादों को याद रखता है। सब उसी इंतजार में जीते है के कोई हमें याद करेगा लेकिन आज कल कहा कोई यादों को याद रखता है। ?????