ऊंगली पकड़ कर मेरी वो बाज़ार के जाया करते थे।
गुड़िया गुड्डे और ढेर सारी मिठाई दिलवाया करते थे।
मांग बैठी जो उनके बस मै ना था।
रूठी हुई में मनाया करते थे।
मेहंदी रची हाथ मेरे वो देख मुस्कुराया करते थे।
विदाई पर मेरी वो हिमालय ,पिघल जाता करते।
आज ढूंढती है निगाहें मेरी पापा आप कहा हो।
सब कहते हे आप चांद तारो के पास हो।
पर ये जी नहीं मानता,ये दिल नहीं मानता।
Miss u papa?
Megha....