बधाई बहुत हो आपको,
गुज़रे जीवन के ये साल,,
साथ निभाया एक-दूजे का,
छोड़ा ना 50 साल से साथ।
शुरु किया था आपने,
शून्य से ये परिवार,,
धीरे-धीरे बढ़ता रहा,
अपना ये हँसी सँसार।
हम सभी को आपने,
दी जीवन की हर सीख,,
संस्कार और शिष्टाचार दे,
हटायी अज्ञानता की कालिख।
आप ही तो दोनों वो,
जिसने हमको हम बनाया,,
खुद कष्टो को सहकर भी,
हम पर हर सुख लुटाया।
माँ तुमको याद तो होगा,
हमको नये कपड़े दिलाना,,
खुद पुराने में खुशी दिखाना,
अपने वो सब त्याग छिपाना।
पापा आप भी नहीं थे कम,
खिलौने भर-भर दिलाते थे,,
भले ही जूते फटे हुए थे,
पर काम तो अभी चलाते थे।
अच्छा माँ बतलाओ ज़रा,
शादी हुई थी जब मेरी,,
पापा ने सब पूँजी लुटा दी,
क्या सच में था वो सब ज़रूरी।
संवारने को भविष्य हमारा,
क्या-क्या वो बलिदान किए,,
ऋण कैसे चुका हम पाएंगे,
अतुलनीय जो एहसान किए।
ईश्वर से बस यहि प्रार्थना,
यूँ ही साथ आपका बना रहे,,
खुश रहो सदा और स्वस्थ रहो,
आशिर्वाद हम पर बरसता रहे।।