महफ़िल को तन्हा किये जा रहा हूँ,
मैं तो अपने आँसूं पिये जा रहा हूँ।
वफ़ा की राह में चला था मगर मैं,
बेवफाई की ज़िन्दगी जिये जा रहा हूँ।
शहनाई की चाहत को मिटने न देना,
तन्हाई को साथ लिये जा रहा हूँ।
सेहरा को अपना कफ़न बना कर,
तुझे सुहाग की सौगात दिये जा रहा हूँ।
कलम से कलाम तो बहुत लिख चुका,
"पागल" अपनी जुबान सिये जा रहा हूँ।
✍?"पागल"✍?