हुस्न से रुबरु
उस शहर का नाम बतावो
जहा तेरा जिक्र ना हो ।
उस दिल का नाम बतावो
जिसको तेरी फिक्र ना हो ।।
जहा से तुम गुजरते हो
हर आशियाना बेपर्दा
हो जाता है।
किसको अपने घर का
चाॅंद नजर आता है । १ |
उस गली, उस मोड से पुछो
उस बुजर्ग साधुसे पुछो।
बेपरवाह हवा से पुछो
गगन की काली घटा से पुछो |२|
सबको तेरा इंतजार है|
मिलने को दिल बेकरार है|
छाने लगी मौसमे बहार है|
पर्दानशीन हुस्न पे प्यार है |३|
अदायें, वफायें , वो कातिल निगाहें
हलकीसी मुस्कान, लज्जा हो बईमान।
वो खिलता जोबन, बातो मेंं साधापन
कही खो गया है इश्क का आफताब।४|
हमारे बगैर ये दौलत किस काम की
लुटाते रहो बिना परवाह की।
चली आवो सुरज ढलनेसे पहले
मोहब्बत का चिराग बुझने से पहले।५|