अब.....
अब हमारे सितारे चमके है,
सफलता की बुँदे गीरी है लबों पैं,
हमको उड ने दो,
अब हमारे पर फुटे है,
हमको उड ने दो,
घाव सारे वक्त ने भर दिये,
हम अभी तो उगरे है,
अब मंजील हमारी मुठ्ठी में है,
सब कुछ बदला हमारा,
अपने भी छोड गए,
दुनिया पराइ हो गई,
किस्मत को लिखना शीखे है हम,
अब हम लकीर को बदलने लगे।
कागज़ो मैं लिखे खवाब,
अब हकीकत बनने लगे।
किताबों में लिखी गई कविता,
अब हकिकत हो गई,
मंजिल सें हमारी दोस्ती हो गई।
शैमी ओझा "लब्ज"