दुनिया की क्या बात करूं
मैं अपनों से ही हार गई
करना था दुनिया मुट्ठी में
लक किस्मत में मार गई।
दुनिया से था क्या लड़ना
जब अपनों ने ही हरा दिया
सोचा समझा कुछ भी तो नहीं था
जो अपनों ने सिला दिया।
लगता था ईश्वर साथ है
फिर डरने की क्या बात है
ईश्वर ने भी दगा दिया
पलटी बदली और भुला दिया।