"आजकल यह भी हो सकता है"
आजकल यह भी हो सकता है,हर तरफ पब्जी गेम
का रंग छाया है,लेकिन पब्जी भविष्य को
कमजोर कर रही है,भगवान आप ही
बताओ यह क्या होरिया है
देखो भविष्य मोबाइल में ,ऐसा डूब गया है
पब्जी गेम सब पर बस गया है
सुबह उठे नही हमारा भविष्य आजकल
मोबाइल के चरण दबा रहा है
कभी व्हाट्सएप्प तो कभी इंस्टाग्राम
अन्य सोशल मीडिया के रंग में भीग गया है
भगवान आप ही बताओ यह क्या होरिया है
अब तो सुन रहे गेम की हवाए जहर खोल रही
पब्जी जैसे खेल किसी की जिंदगी से खेल रही है
हमारा भविष्य और शिक्षा गुम हो रही है
हमारे संस्कार और शिक्षा जैसे विलुप्त से हो रहे है
आने वाले भविष्य के दिमाग सुप्त से हो रहे है
डिजिटल इंडिया के दौर में देश किस ओर बढ़ रहा है
भगवान आप ही बताओ ,यह क्या होरिया है।
मेरे द्वारा स्वरचित रचना,,,अक्षय भंडारी 9893711820
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