शाब्दिक श्रद्धांजली......
एक उमीद थी वो चली गई,
एक माँ का चिराग बुझ गया,
तो पापा की परी उड गई बिचारी.
एक आग ने हमारे सुरती,
बच्चे को समा लिया।,उनके माँ बाप रोते रह गए,
एक मां बाप का इन्तजार आँसु बनके रह गया.
संकट आया है सुरती परिवारो मैं,
हमारा गुजरात का हसता हुआ शहर,
सुरत शौक मैं डुबा है.चलो भाई बहेनो हमारे,
सुरती भाई बहेनो की हिंमत बने.
एक बच्चा बिचारा चल बसा,
एक मा बाप का जीगर का टुकडा छीन गया,
हमारे मित्र शहर के शौक मैं सामील हो जाये,
भगवान शिव उनको दर्द शहने की ताकत दे,
हम भाई बहेनो हिंमत बने,
सुरती भाई बहेनो की,
जो शहर दिलदार है,
वो रंगीन शहर,
हमारे गुजरात का हिस्सा उदास है,
हम महेसाणा वासी उनके हम दर्द बन जाए.
हमारे दोस्त शहर की ,
ताकत बन जाये हम,
लानत है वो कुत्तों पें,
ए देखते हुए भी आगे न आया कोई,
साले आप इन्सांन कहलाने के काबील न,
क्या इन्सानियत है आपकी वाह,
जानवर भी आपकी हरकत देखके शर्मा जाए,
जो परिवारो ने अपना बेटा बेटी खोया,
जीनकी जाने गई ,उनके परिवार को न्याय दिलाये,
(भगवान उनके आत्मा को शान्ति दे,उनके माँ बाप को
हिंमत दे इस घाव को पीने की,)
om santi ??
Shaimee oza "labj"